Tuesday, November 24, 2020
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भारत-चीन सीमा विवाद

भारत चीन का इतिहास :

भारत-चीन का इतिहास इस प्रकार है की प्राचीन काल में जम्मू कश्मीर राज्य में अलग-अलग राजाओं का शासन हुआ करता था। सबसे पहले महाराजा रणजीत सिंह ने 1808 में जम्मू, 1819 में कश्मीर और 1834 में लद्दाख पर विजय प्राप्त करी और लद्दाख को जम्मू में मिला लिया था ।

महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य कमजोर होता गया,उसके बाद डोगरा वंश के महाराज गुलाब सिंह बने परंतु 1841 में चीन ने लद्दाख पर आक्रमण कर लिया और सिखों पर जीत प्राप्त की परंतु शांति को बनाए रखने के लिए चीनियों ने संधि कर ली जिसके बाद सिख पुनः शांतिपूर्वक शासन करने लगे किंतु भारत में अंग्रेजों का शासन होने के कारण 1846 में ब्रिटिश और सिखों के बीच युद्ध होता है जो इतिहास में पहला एंगलो सिख युद्ध कहलाया।

इसमें कश्मीर के महाराज गुलाब सिंह ने अंग्रेजों की बहुत मदद की इसलिए ब्रिटिश ने गुलाब सिंह को अमृतसर संधि के तहत 7500000 रुपए में जम्मू कश्मीर बेच दिया इस तरह जम्मू-कश्मीर के पहले महाराजा गुलाब सिंह बने यह अंग्रेजो के तहत ही काम करने लगे। 1865 में ब्रिटिश इंडिया के सिविल सर्वेंट जॉनसन ने जॉनसन लाइन प्रस्तावित की जिसके हिसाब से अक्साई चीन को जम्मू कश्मीर का हिस्सा बताया गया भारत वर्तमान में इस जॉनसन लाइन को फॉलो करता है, इसी जॉनसन लाइन से शिंजियांग प्रांत लगा हुआ था जो पहले स्वतंत्र हुआ करता था किंतु बाद में चीन ने इस पर कब्जा कर लिया उसके बाद चीन भी अक्शाई चीन को लेकर अपनी रूचि दिखाने लगा ।

1899 ब्रिटिश काउंसिल george macartney ने एक लाइन का प्रस्ताव दिया, इस प्रस्ताव को चीन तक क्लाउड मैकडोनाल्ड ने पहुंचाया था इसलिए इस लाइन का नाम macartney macdonald line पड़ा जिसे चाइना 1959 में स्वीकार किया इसके पीछे चीन का मकसद तिब्बत पर अधिकार करना था, इसी समय चीन ने अक्साई चीन क्षेत्र पर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया था परंतु भारत इसे अपना अधिकार क्षेत्र मानता था, जिस विवाद के कारण 1962 में चीन और भारत का युद्ध हुआ जिसमें चीन सेना अधिक शक्तिशाली साबित हुई और उसने अपनी पश्चिमी सीमा का विस्तार किया और अक्साई चीन पर कब्जा कर लिया और युद्ध के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां पर थी उसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल कहां गया।

यह भी पढ़ें – भारतीय सेना ने भी दिया china को मुंहतोड़ जवाब

पहाड़ों की तीखी ढलान और तालाबों के कारण लद्दाख क्षेत्र में सीमा की मार्किंग सही से नहीं हो पाई जिसके कारण समय-समय पर दोनों सेनाओं में विवाद होते रहते हैं। गलवान घाटी और पेंगोंग झील में मार्किंग ना होने के कारण यहां पर अक्सर विवाद होता है जैसा कि आज गलवान घाटी में देखने को मिला जिसमें हमारे 2 सैनिक और एक अफसर शहीद हो गए।

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