Monday, April 12, 2021
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रक्षाबंधन : भाई-बहन के प्यार को समर्पित एक त्योहार

इस साल रक्षाबंधन 3 अगस्त 2020 में सोमवार को है Raksha bandhan

रक्षाबंधन का त्योहार सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस साल यह 3 अगस्त को पड़ रहा है। रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है। रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। भाई बहन के प्यार भरे रिश्ते को समर्पित यह त्योहार पूरे देश भर में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी या रक्षा सूत्र बांधती हैं।

राखी या रक्षा सूत्र बंधवाने का मुहूर्त : Auspicious time to tie Rakhi or Raksha Sutra :

सुबह (morning)9:24Am से 10:30Am
दोपहर (noon)01:30Pm से 06:00Pm
शाम (evening)6Pm से 7:30Pm
रात (night)10:30Pm से 12:00Pm

भाई बहन का रिश्ता :

कहने को तो बहने, भाइयों की कलाई में राखी बांधकर अपनी रक्षा का वचन लेती हैं लेकिन भाई बहन का रिश्ता इससे कहीं बढ़कर होता है।

भाई बहन के रिश्ते की सबसे खास बात होती है कि दोनों हमउम्र होते हैं, हमउम्र होने के नाते दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त होने के साथ-साथ अच्छे गाइड भी होते हैं। बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो हम अपने मम्मी पापा से नहीं कर पाते वहां पर भाई-बहन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है और वहां पर भाई बहन एक दूसरे को अच्छे तरीके से गाइड करते हैं।

rakshabandhan quotes

कहते हैं एक पिता के बाद किसी लड़की को कोई सच्चा प्यार और सम्मान देता है तो उसका भाई होता है और मां के बाद किसी लड़के को कोई हद से ज्यादा प्यार करती है तो वह उसकी बहन होती है।

एक दूसरे से मजाक करने, लड़ाई करने, एक दूसरे को तंग करने, परेशान करने में भाई बहन कभी पीछे नहीं रहते

rakshabandhan quote
image source- quora.com

लेकिन साथ साथ में एक दूसरे का ख्याल रखने में भी भाई बहन पीछे नहीं हटते ।

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जेनरेशन गैप हो, सोच का फर्क या फिर हद से ज्यादा एक्सपेक्टेशन (expectation) किसी ना किसी वजह से हर रिश्ता कहीं ना कहीं कॉम्प्लिकेटेड (complicated) होता है लेकिन दोस्ती के अलावा एक भाई बहन का रिश्ता ही ऐसा होता है जो काफी सरल-सहज होता है और सारी कॉम्प्लिकेशन (complicated) से दूर रहता है।

रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा (Legend related to Rakshabandhan):

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  1. रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां सुनने को मिलती हैं। एक कहानी के अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्री कृष्ण की तर्जनी उंगली में चोट आ गई थी, यह देखकर द्रोपदी ने तुरंत खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़ कर उनकी उंगली पर बांध दी थी तब भगवान श्री कृष्ण ने हमेशा द्रौपदी की रक्षा करने का वादा किया था, वह दिन भी सावन महीने की पूर्णिमा तिथि का था। इसका कर्ज भगवान श्री कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचा कर उतारा था । तब से सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को राखी बांधने का क्रम शुरू हुआ।
  2. एक अन्य कहानी के अनुसार एक बार राजा बाली के आग्रह करने पर भगवान विष्णु उनके द्वारपाल बनने के लिए तैयार हो गए और उनके साथ पाताल लोक चले गए। कई दिनों तक माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को नहीं देखा तो चिंतित होकर नारद मुनि के पास गई तब नारद मुनि ने माता लक्ष्मी को पूरी बात बताई और साथ ही उन्हें वापस लाने का तरीका भी बताया।

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रक्षाबंधन से जुड़ी एक घटना यह भी बताई जाती है कि व्यक्तियों के राजा बलि ने अपने यज्ञ पूर्ण करने के पश्चात राजा बलि काफी शक्तिशाली हो गए थे इससे उनका डर बढ़ गया था और देवताओं ने सोचा कि कहीं वह देव लोक पर अपना अधिकार ना कर ले इससे चिंतित होकर सभी ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी और भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से भिक्षा मांगी। भिक्षा में भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग भूमि देने के लिए कहा और राजा बलि के लिए तैयार हो गए भगवान विष्णु ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे में पृथ्वी को पूर्ण कर लिया जब राजा बलि ने तीसरा पैर आगे बढ़ते देखा अब कोई स्थान पर रखने के लिए नहीं है तो राजा बलि ने अपना सर आगे कर दिया कहां की तीसरा पर उनके सर पर रखें इस प्रकार राजा बलि से स्वर्ग और पृथ्वी पर अधिकार से वंचित हो गए और रसातल में जा पहुंचे।

लेकिन राजा बलि ने अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को अपने साथ रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु राजा बलि के द्वारपाल बन गए काफी वर्ष हो गए और माता लक्ष्मी अत्यंत चिंतित हुई वह भगवान विष्णु को वापस लाना चाहती थी । तब इस समाधान को दूर करने के लिए माता लक्ष्मी राजा बलि के पास गई और उन्हें जाकर राखी बांधी और उन्हें अपना भाई बना लिया और उपहार में उन्होंने भगवान विष्णु को मांगा तत्पश्चात भगवान विष्णु राजा बलि के के साथ से मुक्त हुए। इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था इसलिए हर वर्ष इस दिन रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है।

नारद मुनि के बताए अनुसार सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को माता लक्ष्मी पाताल लोक पहुंच गई और राजा बाली को रक्षा सूत्र बांधा और साथ ही में यह वचन मांगा कि वह भगवान विष्णु को उन्हें वापस कर दे। रक्षा सूत्र में बंधे होने के कारण राजा बाली को माता लक्ष्मी की बात माननी पड़ी। तभी से सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को यह दिन रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है।

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