Wednesday, November 25, 2020
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सूर्य को अर्ध्य दिये जाने के पीछे वैज्ञानिक तर्क

सर्वप्रथम सूर्य को देखते हुए जल चढ़ाने को अर्ध्य देना कहा जाता है। सूर्य को जल चढ़ाने के पीछे अनेक तथ्य हैं। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार देखा जाए तो सूर्य में बहुत तेज होता है। अगर नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाया जाए, तो वह व्यक्ति को प्रभावशाली बनाता है। तथा लोगों द्वारा उस व्यक्ति को सम्मान तथा सहयोग मिलता है, और उच्च पद का सम्मान आदि प्राप्त होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो सूर्य सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सूर्य की सुबह की किरणें लोगों में आत्मविश्वास जगाती हैं,सूर्य की किरणों से हमें विटामिन-डी भी प्राप्त होता है, जो हड्डियों को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है, तथा शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को दूर करती है। तथा सूर्य को केवल जल चढ़ाने से जीवन की लगभग हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।

जल चढ़ाने समय इन सावधानियों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

  • सूर्य को जल तांबे के लोटे से चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • सूर्य को जल चढ़ाते समय ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
  • मन में पूर्ण विश्वास और श्रद्धा होनी चाहिए।
  • मन पूरी तरह से साफ होना चाहिए।

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  • बिना स्नान किए कभी जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • प्रातः जल चढ़ाना चाहिए।
  • इससे अधिक लाभ प्राप्त होता है।
  • जल चढ़ाने के बाद तथा जल चढ़ाते समय यदि “ओम सूर्याय नमः” का जाप करें, तो यह अधिक लाभदाय होता है।

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