Tuesday, November 24, 2020
Home Articles History उत्तराखंड : गोरखा शासन , जानिए पूरा इतिहास

उत्तराखंड : गोरखा शासन , जानिए पूरा इतिहास

गोरखा शासन :

उत्तराखंड : गोरखा शासन, नेपाल के निवासी गोरखा थे जो कि बहुत लड़ाकू और साहसी थे। कुमाऊं में चंद्र शासकों की कमजोरी का फायदा उठाते हुए 1790 ईस्वी में उन्होंने एक छोटे से युद्ध के बाद अल्मोड़ा पर अधिकार कर लिया था।
इसके पश्चात उन्होंने गढ़वाल पर 1791 में आक्रमण किया लेकिन वह पराजित रहे।

  • फरवरी 1803 में संधि के विपरीत अमर सिंह थापा और हस्तीदल चौतरिया के नेतृत्व में गोरख ओने गढ़वाल पर दोबारा आक्रमण किया और इस बार वह सफल रहे। गढ़वाल नरेश प्रदुमन शास्त्री नगर छोड़कर भाग गए।
  • 14 मई 1804 को गढ़वाल नरेश प्रदुमन सा और गोरखओं के बीच में देहरादून के खुड़बुड़ा मैदान में निर्णायक युद्ध हुआ युद्ध के दौरान गढ़वाल नरेश शहीद हो गए और कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र पर गोरखओं का शासन हो गया।
  • प्रदुमन शाह के पुत्र सुदर्शन शाह आमंत्रण पर अक्टूबर 18 से 14 मई गढ़वाल को मुक्त कराने के लिए अंग्रेजी सेना का सहारा लिया। उन्होंने गोरखाओं को पराजित कर गढ़वाल राज्य को मुक्त करा दिया इसके बाद केवल कुमाऊं क्षेत्र में ही गोरखाओं का अधिकार रहा।

यह भी पढ़ें- भारत नेपाल सीमा विवाद history

  • अप्रैल 1815 में कर्नल निकोलस और कर्नल गार्डनर ने कुमाऊं के अल्मोड़ा को तथा जनरल ऑक्टरलोनी ने 15 मई 1815 को वीर गोरखा सरदार अमर सिंह थापा से मलाव का किला जीत लिया।
  • कर्नल गार्डनर तथा नेपाली गोरखा शासक बम शाह के बीच हुई संधि के तहत कुमाऊँ की सत्ता अंग्रेजों को सौंप दी गई।
  • अमर सिंह थापा की हार के पश्चात गोरखाओं और अंग्रेजों के मध्य 23 नवंबर अट्ठारह सौ पंद्रह को संगोली में एक संधि हुई।
  • सुगौली संधि को नेपाल ने अस्वीकार कर दिया था अतः अंग्रेजों ने फरवरी 1816 में नेपाल पर आक्रमण करके काठमांडू के पास गोरखाओं को पराजित किया। इसके पश्चात नेपाल सरकार ने संगोली संधि को स्वीकार कर लिया।

सुगौली संधि के प्रमुख फैसले :

  1. गोरखा अपनी-अपनी दक्षिणी सीमा के किनारे की निचली भूमि से अपना दावा छोड़ना स्वीकार किया।
  2. गढ़वाल और कुमाऊं की जिले अंग्रेजों को सौंप दिए गए ।
  3. काठमांडू में एक ब्रिटिश रेजीमेंट रखना स्वीकार किया ।
  4. गोरखा को ब्रिटिश सेना में भर्ती करने की सहमति हुई ।

कुमाऊं पर गोरखाओं का शासनकाल 25 वर्ष का था और गढ़वाल पर और खाओ का यह शासन 10.5 साल का था। कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों पर गौरखाओ का यह शासन बहुत ही अन्याय और अत्याचार पूर्ण था। इस अत्याचारी शासन को उत्तराखंड की लोक भाषा में गौरख्याली कहा जाता है

read more important: uttrakhand gk

read more important: uttrakhand samanya addhyan

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Current Affairs 2 sept. 2020

HINDI CURRENT AFFAIRS HINDI CURRENT AFFAIRS AND MOST IMPORTANT CONTENT FOR UPCOMING EXAMS लुईस हैमिल्टन...

महिला समानता दिवस : 26 अगस्त

महिला समानता दिवस हर साल 26 अगस्त को मनाया जाता है। महिला समानता की सबसे पहली शुरुआत न्यूजीलैंड ने 1893 में की...

गणेश चतुर्थी 2020

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?? भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को...

कृष्ण जन्माष्टमी 2020

कृष्ण जन्माष्टमी ( KRISHNA JANMASTMI ) कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष पर बनाई जाती है...

Recent Comments